प्रिय साथियो,
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करते हुए हर्ष हो रहा है कि केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा अनुवाद अधिकारी एसोसिएशन
को आज 8वें वेतन आयोग द्वारा अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया गया था। नई दिल्ली में आयोग के सचिवालय
पर आयोजित हुई इस बैठक में आयोग की माननीय अध्यक्षा, श्रीमती जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत न्यायधीश),
आयोग के सदस्य प्रो. पुलक घोष (प्रोफेसर आईआईएम बेंगलूरू एवं माननीय
प्रधानमंत्री जी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य) एवं सदस्य-सचिव श्री पंकज जैन
(सेवानिवृत आईएएस एवं पूर्व सचिव पैट्रोलियम मंत्रालय)
सहित आयोग के दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
दूसरी ओर एसोसिशन की ओर से श्री सौरभ आर्य (अध्यक्ष), श्रीमती विशाखा बिष्ट (उपाध्यक्ष), श्री सुनील चौरसिया (महासचिव) एवं श्री शुभम रामावत (संयुक्त सचिव) उपस्थित थे।

यह एआई जेनरेटेड प्रतीकात्मक चित्र है, वास्तविक नही है
बैठक में प्रमुख रूप से कनिष्ठ अनुवाद अधिकारियों एवं वरिष्ठ अनुवाद अधिकारियों की वेतन संरचना पर विस्तार से चर्चा की गई और एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से राजभाषा सेवा संवर्ग से जुडे तमाम पक्षों को प्रस्तुत किया गया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अनुवाद अधिकारियों की शैक्षणिक योग्यताओं, उनके कार्य के दायित्वों, अनुवाद और कार्यान्वयन के दोहरे दायित्वों, निरंतर बढ़ते कार्यभार, ब्रेन ड्रेन, पूर्व वेतन आयोगों की अनुशंसाओं, बाद में प्रशासनिक आदेशों से उत्पन्न हुई विसंगतियों, देश भर की अदालतों में चल रहे मामलों और अनुवादकों के पक्ष में आए उच्चतम न्यायालय, उच्च नयायालयों और कैट के पचासों मामलों पर विस्तार से चर्चा की।
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| बैठक में भाग लेने वाले एसोसिएशन के पदाधिकारी |
आयोग की अध्यक्ष
महोदया ने गंभीरतापूर्वक सभी बातों को सुना। आयोग के माननीय सदस्यों ने भी कुछ बिंदुओं
पर अपनी जिज्ञासाएं रखीं जिनका उत्तर एसोसिएशन के सदस्यों ने दिया। आयोग के सभी सदस्यों
का रुख सकारात्मक था। एसोसिएशन ने आयोग के समक्ष निम्न मांगें रखी हैं-
1.
कनिष्ठ अनुवाद अधिकारियों
के लिए 4600 ग्रेड वेतन
2.
वरिष्ठ अनुवाद अधिकारियों
के लिए 4800 ग्रेड वेतन सहित राजपत्रित दर्जा
हम आशा करते हैं कि
आयोग गंभीरतापूर्वक हमारी मांगों पर विचार करेगा और अनुवाद अधिकारियों के साथ बरसों
से हो रहे अन्याय को समाप्त करेगा। हम आयोग के सभी माननीय सदस्यों के प्रति कृतज्ञता
व्यक्त करते हैं कि उन्होंने अपने व्यस्ततम समय में से हमें अपनी बात रखने के
लिए न केवल पर्याप्त समय दिया बल्कि धैयपूर्वक हमारे पक्ष को सुना।

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