प्रिय मित्रो, कनिष्ठ अनुवादकों हेतु 4600 /- ग्रेड वेतन के मामले को लेकर संवर्ग के
अनुवादक अपने स्तर पर पूर्व में दो
बैठकें क्रमश: 15 अक्तूबर और 25 अक्तूबर को कर चुके हैं. इन बैठकों का पूर्ण
विवरण हमारे ब्लॉग तथा फेसबुक की कम्यूनिटी में नियमित रूप से अपडेट किया जाता
रहा है. फिर भी जो अनुवादक साथी इन बैठकों में नहीं आ सके अथवा जिनके मन में
उपर्युक्त मामले के संबंध में विभिन्न सवाल उठ रहे हैं उनके लिए सभी संभावित
प्रश्नों के उत्तर हम यहां देने की कोशिश कर रहे हैं। आप सभी से अनुरोध है कि
सबसे पहले तो मामले को अपनी समझ से समझें, दूसरों के बताने पर
मामले की कमजोरी या मजबूती की बातों पर यकीन न करें.
प्रश्न 1. 4600 ग्रेड वेतन के लिए नया केस दर्ज
करने के क्या आधार हैं ?
उत्तर : यह नया केस व्यय विभाग की 13.11.2009
के आदेश की व्याख्या को चुनौती देगा. दरअसल यह केस कैट में दायर किया जाएगा
जिसमें राजभाषा विभाग को पार्टी बनाया जाएगा क्योंकि विभाग ने जनवरी, 2013 में एसोसिएशन द्वारा 4600 ग्रेड वेतन के
संबंध में भेजे गए प्रतिवेदन को खारिज कर दिया है । हमारे पक्ष में श्रीमती टीपी
लीना द्वारा एरनाकुलम कैट, केरल उच्च न्यायालय और
सर्वोच्च न्यायालय में जीते गए केस और अभी हाल ही में 14 अक्तूबर, 2013 का एरनाकुलम फुल बैंच का आदेश है जिसमे न्यायालय
ने माना है कि ‘13.11.2009 के व्यय
विभाग के आदेश के अनुसार केन्द्र सरकार के अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ
हिंदी अनुवादक 4600 ग्रेड वेतन के हकदार हैं’. इसके अलावा भी हमारी टीम की इस मामले में गहराई
से की गई रिसर्च के उपरांत कई और रोचक तथ्य एवं तर्क सामने आए हैं जिनसे हम अपने
पक्ष को मजबूती के साथ अदालत में रख सकते हैं.
प्रश्न 2. क्या यह नया केस पहले से कैट में
विचाराधीन 1986 वाले मामले को प्रभावित करेगा?
उत्तर : जी नहीं, बेशक दोनों मामलों का परिणाम एक ही होगा मगर दोनों मामलों का आधार अलग अलग
है. जो तथ्य और तर्क नए केस में प्रस्तुत किए जा रहे हैं वे 1.1.2006 के बाद उत्पन्न
हुई विसंगतियों के बारे में हैं. जबकि 1986 का मामला सीएसएस असिस्टेंट के साथ
पैरिटी का है.
प्रश्न 3. पांच ही पैटीशनर्स क्यों, हर
अंशदाता पैटीशनर्स में क्यों नहीं ?
उत्तर : किसी भी केस को लड़ने वाला एड़वोकेट
केस की फीस पैटीशनर्स की संख्या के आधार पर तय करता है. यदि हम पांच पैटीशनर्स
केस लड़ रहे हैं तो फीस अलग होगी और यदि 100 पैटीशनर्स का नाम केस में होगा तो फीस
कई गुना बढ़ जाएगी । हम सभी जानते हैं कि भारी भरकम फीस हम दे पाने की स्थिति में
नहीं हैं. मात्र 1000 रूपए के साथ क्या किसी केस में पैटीशनर बना जा सकता है ? हम यहां रणनीतिक रूप से आगे बढ़ रहे हैं इसमें
संवर्ग के साथियों को लीड़ कर रही टीम पर भरोसा करना होगा. यहां यह उल्ल्ेखनीय है
कि इस मामले को लीड़ कर रही टीम के सभी सदस्य पैटीशनर्स में शामिल नहीं हैं. शेष लोग
भी पूरी शिद्दत से इस मामले में मेहनत कर रहे हैं. पैटीशनर्स मात्र तकनीकी औपचारिकता
हैं.
प्रश्न 4. क्या इस केस को जीतने की स्थिति में
लाभ सिर्फ 5 पैटीशनर्स को मिलेगा अथवा पूरे संवर्ग के अनुवादकों को ?
उत्तर : इस संबंध में तीन संभावनाए हैं –
1.
सबसे पहली और प्रबल संभावना है कि लाभ एक साथ ही पूरे संवर्ग के अनुवादकों को
मिल सकेगा. चूंकि हम केस की प्रेयर में ही सीएसओएलएस संवर्ग के अनुवादकों के लिए रिलीफ
मांगेंगे. यदि फैसला हमारे पक्ष में होता है तो यह लाभ सभी को तुरंत मिलना चाहिए.
2.
दूसरी संभावना में, एक क्षण के लिए हम मान लेते
हैं कि फैसला सिर्फ एप्लीकेंट्स के हक में हुआ. तो भी कॉमन सेंस कहता है कि एक ही
कैडर के कुछ लोग अलग स्केल लें और बाकी लोग अलग. ये संभव नहीं है. इसके लिए हमारी
टीम विभाग को एक खास नियम के तहत आवेदन करेगी. इस संबंध में जनवरी, 2013 के स्वामी न्यूज में एक प्रावधान है... "(Swamy's
News Item 12 page 86, January 2013) जिसका आशय यह है कि “Service benefit granted to an employee by a judiciary in a
case is applicable to similarly situated other employees of a department
without the other employees of the department approaching the judiciary for the
same benefit." यह आदेश हमें भी पूर्ण रूप से लागू होता
है।"'
3.
हम यह भी संभावना लेकर चल रहे हैं कि हो सकता है कि राजभाषा विभाग उपर्युक्त प्रावधान
को भी न माने. उस स्थिति में भी हमार टीम कार्रवाई करेगी. इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय
में समानता के मौलिक अधिकार के हनन के लिए एक याचिका दायर की जाएगी जिसमें अदालत एग्ज्यीक्यूटिव
यानि कि विभाग को सभी समान कर्मचारियों को समान लाभ प्रदान करने के निदेश देगी.
मित्रो, यहां पांच पैटीशनर्स
मात्र इस केस की तकनीकी औपचारिकता हैं हमारा उद्देश्य पूरे संवर्ग के अनुवादकों को
लाभ दिलाना है और यदि फैसला हमारे हक में होता है तो हमारा कार्य तभी पूरा होगा जब
संवर्ग के हर एक अनुवादक को यह लाभ प्राप्त हो जाएगा.
प्रश्न 5. : प्रति व्यक्ति अंशदान कितना है और कैसे दिया जा सकता है ?
उत्तर
: प्रति व्यक्ति अंशदान 1000 रू है जिसे निम्नलिखित प्रतिनिधियों को सौंपा जा सकता
है :
·
* श्रीमती
विशाखा बिष्ट, राजस्व विभाग, नॉर्थ ब्लॉक
* सुश्री पूनम विमल, कृषि मंत्रालय, कृषि भवन
* सुश्री पूनम विमल, कृषि मंत्रालय, कृषि भवन
* श्री राकेश श्रीवास्तव, नारकोटिक्स कंट्रोल
ब्यूरो, आर. के पुरम.
* श्री सौरभ आर्य, वस्त्र मंत्रालय, उद्योग भवन
* श्री दीपक डागर, आर्थिक कार्य विभाग, नॉर्थ ब्लॉक
* श्री ओमप्रकाश कुशवाहा, रक्षा मंत्रालय
* श्री मणिभूषण, पर्यावरण मंत्रालय
* श्री सौरभ आर्य, वस्त्र मंत्रालय, उद्योग भवन
* श्री दीपक डागर, आर्थिक कार्य विभाग, नॉर्थ ब्लॉक
* श्री ओमप्रकाश कुशवाहा, रक्षा मंत्रालय
* श्री मणिभूषण, पर्यावरण मंत्रालय
इस केस को दायर करने के लिए पर्याप्त अंशदान अभी तक प्राप्त नहीं हो पाया है हमें जल्द से जल्द अपने हाथ मजबूत करने होंगे ताकि किसी भी आवश्यकता की स्थिति में हम कमजोर न पड़ें. फंड के रखरखाव की मॉनीटरिंग कोऑर्डीनेशन कमेटी द्वारा नियमित आधार पर की जाएगी एवं अधिकतम पारदर्शिता बरती जाएगी.
जो साथी दिल्ली से बाहर हैं और अंशदान करना चाहते हैं वे नीचे दिए जा रहे दो ऑन
लाइन अकाउंट्स में 1000 रू की राशि जमा कर सकते हैं. कृपया ऑनलाइन कांट्रीब्यूशन जमा
करने के बाद इसका विवरण ईमेल translatorsofcsols@yahoo.in
पर अपने नाम और पते के साथ अवश्य
भेजें.
1. Saurabh Arya, Central Bank Of India, Branch
Name: Udyog Bhawan (New Delhi)A/c No. 3098379559. IFSC CODE CBIN 0282169
2. Vishakha Bisht, ICICI, A/c No. 015401506654,
IFSC CODE : ICICI0000154. Branch – Pitampura New Delhi.
कृपया ऑनलाइन ट्रांसफर को अंतिम विकल्प के रूप में ही प्रयोग करें. सभी अंशदाताओं का विवरण ब्लॉग पर सार्वजनिक किया जाएगा.
दोस्तो, उपर्युक्त के अलावा
भी यदि आपका कोई भी प्रश्न हो तो कृपया सीधे श्री सौरभ आर्य से 09711337404 पर अथवा
श्री दीपक डागर से 09871136098 पर (केवल केस से संबंधित तकनीकी जानकारी के लिए) (किसी
भी कार्यदिवस में) पूछ सकते हैं. हम जल्द ही एक और बैठक आयोजित करने जा रहे हैं तब
तक आप सभी से अनुरोध है कि इस विषय को समझें, जागरूक बनें और प्रयास
में हाथ बंटाएं. यदि मिलकर ये जंग लडेंगे तो जरूर जीतेंगे.
